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किसान आत्महत्या

हमारे देश में किसानों की आत्महत्या एक राष्ट्रीय समस्या का रूप धारण कर चुकी है। आये दिन देश के किसी ना किसी हिस्से से किसानों के आत्महत्या करने की दुखद खबरें मिलती रहती हैं। देश की कुल आत्महत्याओं में से लगभग 10-11 प्रतिशत किसानों की आत्महत्याएं है। देश की प्रगति एवं विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद भी किसानों को जिन्दगी से निराश होकर मानसिक, आर्थिक मजबूरी के कारण ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह निश्चित रूप से अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। देश में किसानो द्वारा आत्महत्या करने के मामलो में अप्रत्याशित तौर पर काफी वृद्धि हुई है। 2017 में कोर्ट ने देश में किसानों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं पर विराम लगाने के लिए तीन सप्ताह के भीतर रोडमैप बनाने का निर्देश भी दिया था। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सिर्फ मरने वाले किसान के परिवार को मुआवजा देना काफी नहीं है। आत्महत्या के कारणों को पहचानना और उनका हल निकालना जरूरी है। इस मसले पर न्यायालय ने केंद्...